अनकही



आज तन्हाई में जब याद तुम्हारी आई 
महक उठी यादो की कलियाँ, धड़कनें घबराईं 
चाँद रुक गया ,रात जग गयी ,चांदनी मुस्काई 


वो तेरा खामोश रहकर मुझसे सब कुछ देना
आँखों ही आँखों में सबसे ,छुप के गपशप कर लेना 
यादों के आँगन से फिर से  धूप सुनहरी छाई 
आज तन्हाई में जब याद तुम्हारी आई 







चलते चलते रास्तों पर हम मिले कुछ इस कदर 
अनजानी राहों में चल के ,कोई पाये अपना घर 
तेरी खुशबू  सांस बनकर ,धड़कनो में समाई
आज तन्हाई में जब याद तुम्हारी आई 


ज़िन्दगी का ये सफर ,है बड़ा मुश्किल सफर 
हर ख़ुशी में हर ग़म में ,तुझको ढूंढें ये नज़र 
आये मुझको याद तुम और आँख ये भर  आई 
आज तन्हाई में जब याद तुम्हारी आई 





 नयन 
जून,२१ ,२०१५ 
Image courtesy : Google 


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